Gestalt Notes In Hindi Pdf Download Complete Insight Theory

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(Gestalt/गेस्टाल्ट/समष्टि)

आज हम आपको Gestalt Notes In Hindi Pdf Download (गेस्टाल्ट/समष्टि) Insight Theory, Max Wertheimer, Wolfgang Kohler, Kurt Koffka, अंतर्दृष्टि सिद्धांत के नोट्स देने जा रहे है जिनको पढ़कर आपके ज्ञान में वृद्धि होगी और यह नोट्स आपकी आगामी परीक्षा को पास करने में मदद करेंगे | ऐसे और नोट्स फ्री में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर रेगुलर आते रहे, हम नोट्स अपडेट करते रहते है | तो चलिए जानते है, (Gestalt/गेस्टाल्ट/समष्टि) के बारे में विस्तार से |

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Insight Theory of Learning

(सीखने का अंतर्दृष्टि सिद्धांत)

Introduction: इस सिद्धांत को गेस्टाल्ट का सिद्धांत भी कहा जाता है क्योंकि इसकी रचना गेस्टाल्ट वादियों ने की थी। गेस्टाल्ट का अर्थ है – संपूर्ण रूप, ‘किसी आकृति या वस्तु का समग्र रूप से अध्ययन करना, वस्तु को एक इकाई के रूप में देखना। उनका मानना था कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए समस्या का पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है। जर्मन मनोवैज्ञानिक “Max Wertheimer” इस सिद्धांत के प्रवर्तक थे। Kurt Koffka और Wolfgang Köhler ने इस सिद्धांत को आगे बढ़ाने में बहुत योगदान दिया। कोहलर प्रयोगकर्ता थे। इसे संज्ञानात्मक क्षेत्र सिद्धांत (Cognitive field theory) भी कहा जाता है। गेस्टाल्टवादी ने मनुष्य की मानसिक क्षमता को अधिक महत्व दिया। उनका मानना था कि किसी समस्या के समाधान के लिए समझ था | सूझ का होना अत्यंत आवश्यक है।
Gestalt Psychology की स्थापना निम्नलिखित व्यक्तियों के कार्यों पर की गई थी।
  1. मैक्स वर्थाइमर (Max Wertheimer)
  2. वोल्फगैंग कोहलर (Wolfgang Kohler)
  3. कर्ट कोफ्का (Kurt Koffka)
  • गेस्टाल्ट का अर्थ समग्र रूप से होता है। पूर्णाकारवाद के अनुसार व्यक्ति किसी चीज को आंशिक रूप से नहीं बल्कि पूर्ण रूप से सीखता है। क्षेत्र सिद्धान्तों में विश्वास करने वालों का मानना है कि किसी व्यक्ति के पर्यावरण की धारणा और आविष्कार के बीच के संबंध को “सीखने का सिद्धांत/अधिगम सिद्धान्त” कहा जाता है।
  • जर्मन मनोवैज्ञानिक Max Wertheimer को Gestalt psychology का जनक कहा जाता है। Thirp और Müller, Wertheimer के सिद्धांत की व्याख्या इस प्रकार करते हैं – Wertheimer के सिद्धांत का केंद्र बिंदु यह तथ्य है कि जब मानव आँख दो दृश्य उत्तेजनाओं को एक के बाद एक देखती है, तो उसकी प्रतिक्रिया ऐसी होती है कि उन उत्तेजनाओं का पैटर्न एक साथ बनता है।
  • कोफ्का (Kurt Koffla) और कोहलर (Wlofgang Kohler) ने Wertheimer के सिद्धांत को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
  • Wertheimer का विचार रहा है कि संपूर्ण बड़ा है और कुछ इसका एक हिस्सा है। (The whole is greater than the sum of its parts) मनोवैज्ञानिकों ने पूर्णतावाद की परिभाषा इस प्रकार दी है – ‘पूर्णतावाद उत्तेजक स्थिति को समझने की विधि है। ‘ (A Gestal is the pattern configuration on form of apprehending a stimulus situation)
Concept: इस सिद्धान्त के अनुसार व्यक्ति किसी प्रक्रिया को सूझ था अन्त दृष्टि द्वारा सीखता है। जब भी व्यक्ति किसी विषय था पाठ को सीखता है तो वह सीखने से संबंधित परिस्थिति को हर पहलू को समझने की कोशिश करता है। इस कोशिश में वह परिस्थिति के विभिन्न पहलुओं को नये ढंग से प्रत्यक्षण कर संगठित करने का प्रयत्न करता है। ताकि समस्या का समाधान आसानी से हो सके। जब वह परिस्थिति के भिन्न-भिन्न पहलूओं को नये ढंग से प्रत्यक्षण कर उससे आपसी संबंधो को समझ जाता है तो उसमें अचानक सूझ उत्पन्न होती है, जिसे अहा ! अनुभव (Aha Exprence) भी कहा जाता है।
केहलर तथा koffka की इस व्याख्या से स्पष्ट है कि सीखना धीरे-धीरे नहीं बल्कि एकाएक होता है। क्योंकि तरा होता हैव न्य कि अभ्यास तथा प्रयत्न एवं भूल द्वारा होता है।
Definition:
  • प्रो. Wlofgang Kohler के अनुसार, अन्तर्दृष्टि में पूर्व दृष्टि निहित होती है। व्यक्ति पहले स्थिति को समझता है और फिर अपनी सूझ-बूझ के अनुसार व्यवहार करता है। “
  • Woodworth के अनुसार, ” अन्तर्दृष्टि का अर्थ है – अच्छा नीरीक्षण, स्थिति को पूर्ण ईकार्ड के रूप में समझना था स्थिति के उन मार्गो को समझना जो लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं।
वुडवर्थ का कहना है कि अंतर्दृष्टि या सूझ बूझ (insight learning theory) एक स्थिति को समग्र रूप से देखने या स्थिति के उन हिस्सों को समझने की क्षमता को संदर्भित करता है जो लक्ष्य प्राप्ति का मार्गदर्शन करते हैं। पूरी स्थिति का बोध और फिर बुद्धिमानी से एक उपयुक्त प्रतिक्रिया प्राप्त करना कई मनोवैज्ञानिकों द्वारा अंतर्दृष्टि अधिगम (insight learning) कहलाता है। दूसरे शब्दों में, यह एक मानसिक क्षमता है जो मनुष्यों और उच्चतर जानवरों में पाई जाती है। अंतर्दृष्टि का सिद्धांत कोहलर ने 1959 में अपनी पुस्तक ‘Gestalt psychology’ में दिया था।

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कोहलर का प्रयोग

(Experiments by Kohler)

अंतर्दृष्टि की पुष्टि करने के लिए, कोहलर ने सुल्तान नामक एक चिंपैंजी पर प्रयोग किए। हालांकि उन्होंने ये प्रयोग कुत्तों और मुर्गियों पर भी किए थे, लेकिन उनका यह प्रयोग बहुत प्रसिद्ध है।

कोहलर ने अपना प्रयोग एक भूखे (वनमानुष) चिम्पैंजी पर किया। जिसका नाम सुल्तान था, वरदीमार और कोफ़्का ने उसके प्रयोग में उसकी सहायता की। उन्होंने चिंपैंजी पर दो तरह से प्रयोग किए। कोहलर ने अपने प्रयोग कुल 6 चिंपांजियों पर किए।

कोहलर का पहला प्रयोग

  • कोहलर ने अपना प्रयोग एक बंद कमरे में किया जिसमें चिपंजी को कुछ दिनों तक भूखा रखा ताकि उसमें उत्तेजना उत्पन्न हो।
  • कोहलर ने उस कमरे की छत पर कुछ केले बांध दिए थे वहां तक पहुंचना चिंपांजी के लिए असंभव था। चिपंजी ने केलों को लेने की कोशिश कि लेकिन उसका हाथ वहां तक नहीं पहुंचा
  • चिंपांजी भूखा था इसलिए केले को देखकर उसमें उत्तेजना उत्पन्न होने लगी और उसने केला प्राप्त करने का  भरपूर प्रयास किया पर उसमें वह असफल रहा। थक कर वह एक कोने में जाकर बैठ गया।
  • उस कमरे में तीन बॉक्स रखे गए थे। कुछ देर के बाद चिंपांजी को कुछ सूझा और उसने उन बॉक्स में से एक बॉक्स को केले के नीचे रखकर उस पर चढ़कर उछला पर केले तक नहीं पहुंच पाया।
  • कुछ देर बाद उसने दूसरा बॉक्स भी पहले बॉक्स के ऊपर रखा और उस पर चढ़कर फिर से केले प्राप्त करने की कोशिश की पर इस बार भी वह असफल रहा
  • फिर उसने तीसरा बुक्स उन बॉक्स के ऊपर रखा और चढ़ा इस बार उन्हें केले प्राप्त हो गया।
  • इस पर कोहलर ने निष्कर्ष निकाला कि अगर किसी भी प्राणी पर कोई समस्या आ पड़ती है तो वह अपनी सूझबूझ से उस समस्या का हल निकाल सकता है जैसे कि चिंपांजी ने किया।

कोहलर का दूसरा प्रयोग

  • दूसरे प्रयोग में कोहलर ने चिंपांजी को एक पिंजरे में रखा और पिंजरे के बाहर कुछ केले रख दिए थे चिंपांजी को केले स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।
  • चिंपांजी भूखा था तथा केले को देख कर बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगे। पर वह केला तक नहीं पहुंच सकता था।
  • पिंजरे के अंदर दो छड़ियां थी जो जुड़ कर एक छड़ी बन जाती थी पर ये बात सुल्तान को नहीं पता था। उसने पहली बार केवल एक ही छड़ी की मदद से केले को पाने की कोशिश की पर छड़ी केले तक पहुंच ही नहीं पाती थी।
  • उसने एक छड़ी से केलों को लेने का प्रयास बिया परंतु असफल रहा। , उसने कई बार प्रयास किया पर वह सफल न हो पाया। फिर उसके मन में अचानक दूसरी छडी आई , कुछ देर के बाद उसने दोनों ही छड़ियों को जोड़ने का प्रयास करने लगा और उसने दोनों छडियो को जोड़ दिया |
  • कुछ देर के बाद वह इसमें सफल हो गया और उसने केले भी प्राप्त कर लिये।इस प्रकार चिंपांजी ने अपने अन्तर्दृष्टि की सहायता से अपना समस्या हल कर लिया।

ये सब क्रियाएं कोहलर देख रहे थे। उन्होंने देखा कि सूझ बूझ द्वारा किसी भी समस्या को हल किया जा सकता है। समस्या को पूर्ण रूप से समझना चाहिए ना कि टुकडों में।

कोहलर के इन प्रयोगों से स्पष्ट है कि समस्या के समाधान के लिए अंतर्दृष्टि और समझ की आवश्यकता है। उच्च विकास स्तर के जानवर प्रयास और गलती के बजाय समझ के प्रयोगों द्वारा समस्या का समाधान करते हैं। साथ ही प्रयोगों से यह स्पष्ट होता है कि समझ तब उत्पन्न होती है जब किसी नई समस्या के समाधान से संबंधित सभी संसाधन एक साथ उपलब्ध होते हैं।

कोहलर ने निरपेक्षता में अंतर्दृष्टि की व्याख्या इस प्रकार की है: “एक अधिक तकनीकी अर्थ एक बार में समाधान को समझ लेना है, जिससे एक प्रक्रिया शुरू हो जाती है जो स्थिति के अनुसार संचालित होती है, और समाधान अवधारणात्मक ज्ञान के क्षेत्र में संख्याओं के संदर्भ में है।


अंतर्दृष्टि को प्रभावित करने वाले कारक

(Factors Influencing Insight)

अंतर्दृष्टि, अचानक समझ और समस्या-समाधान की विशेषता, विभिन्न कारकों से प्रभावित हो सकती है। इन कारकों को समझना उन परिस्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए आवश्यक है जिनके तहत अंतर्दृष्टि होने की अधिक संभावना है। यह खंड कुछ प्रमुख कारकों का वर्णन और व्याख्या करता है जो अंतर्दृष्टि को प्रभावित करते हैं, जिसमें बुद्धि, अनुभव, समस्या की धारणा और परीक्षण और त्रुटि शामिल हैं।

  1. बुद्धि (Intelligence): अंतर्दृष्टि शामिल व्यक्ति या प्राणी की बुद्धि से संबंधित है। आम तौर पर, उच्च बुद्धि स्तर वाले व्यक्ति अंतर्दृष्टि के लिए अधिक क्षमता प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य, जो अपनी उच्च संज्ञानात्मक क्षमताओं के लिए जाने जाते हैं, अक्सर कम संज्ञानात्मक क्षमताओं वाले अन्य जानवरों की तुलना में अंतर्दृष्टि के अधिक उदाहरण प्रदर्शित करते हैं।
    उदाहरण: एक पहेली को सुलझाने के कार्य में, उच्च बुद्धि स्तर वाले व्यक्ति जल्दी से पैटर्न को पहचान सकते हैं, संबंध बना सकते हैं, और कम बुद्धि वाले व्यक्तियों की तुलना में अधिक कुशलता से व्यावहारिक समाधान तक पहुंच सकते हैं।
  2. अनुभव (Experience): अंतर्दृष्टि को बढ़ावा देने में अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी विशेष डोमेन में समृद्ध अनुभव वाले व्यक्तियों के पास व्यापक ज्ञान का आधार होता है, जो पैटर्न और कनेक्शन की पहचान की सुविधा प्रदान कर सकता है। एक स्थिति से दूसरी स्थिति में अनुभव का स्थानांतरण अंतर्दृष्टि के विकास में योगदान कर सकता है। अनुभवी व्यक्ति अक्सर अपने अतीत के अनुभवों को आकर्षित करते हैं और नई समस्याओं को अधिक कुशलता से हल करने के लिए प्रासंगिक अंतर्दृष्टि लागू करते हैं।
    उदाहरण: वर्षों के पाक (पकवान) अनुभव के साथ एक अनुभवी रसोइया एक नया व्यंजन बना सकता है और जल्दी से संघटक संयोजन या खाना पकाने की तकनीक की पहचान कर सकता है जो पकवान को बढ़ा सकता है। विभिन्न स्वादों के साथ प्रयोग करने से प्राप्त उनके पिछले अनुभव और अंतर्दृष्टि अभिनव और स्वादिष्ट भोजन बनाने की उनकी क्षमता में योगदान करते हैं।
  3. समस्या का प्रत्यक्षीकरण (Perception): जिस तरह से एक समस्या को माना जाता है वह अंतर्दृष्टि की संभावना को प्रभावित कर सकता है। अंतर्दृष्टि होने के लिए समस्या की स्पष्ट और सटीक समझ महत्वपूर्ण है। समस्या का सूत्रीकरण और निर्धारण व्यक्ति की व्यावहारिक समाधान उत्पन्न करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। एक नया परिप्रेक्ष्य या समस्या को समझने का एक अलग तरीका मानसिक अभ्यावेदन के पुनर्गठन को गति प्रदान कर सकता है और अंतर्दृष्टि की ओर ले जा सकता है।
    उदाहरण: इंजीनियरों के एक समूह को एक पुल के लिए एक जटिल डिजाइन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक इंजीनियर पुल के पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करके समस्या को फिर से परिभाषित करता है, जिससे यह अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है कि पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग करने वाला एक टिकाऊ डिजाइन दृष्टिकोण कार्यक्षमता और पर्यावरणीय चिंताओं दोनों को संबोधित कर सकता है।
  4. परीक्षण त्रुटि विधि (Trial and Error): जबकि अंतर्दृष्टि अक्सर अचानक समझ से जुड़ी होती है, कुछ मनोवैज्ञानिकों का तर्क है कि “परीक्षण और त्रुटि” प्रक्रियाएं अंतर्दृष्टि के उद्भव के अभिन्न अंग हैं। इस दृष्टि से, समस्या-समाधान के दौरान की गई प्रारंभिक कार्रवाइयों में विभिन्न प्रयास शामिल होते हैं, और क्रमिक पुनरावृत्तियों के माध्यम से, अंतर्दृष्टि धीरे-धीरे उभरती है। परीक्षण और त्रुटि प्रक्रियाओं में निवेश किया गया प्रयास उस नींव का निर्माण करता है जिस पर अंततः अंतर्दृष्टि हो सकती है।
    उदाहरण: एक आविष्कारक एक नई प्रकार की बैटरी बनाने का प्रयास कर रहा है। कई परीक्षण और त्रुटि प्रयोगों के माध्यम से, वे सामग्री के विभिन्न संयोजनों की कोशिश करते हैं, अनुपात समायोजित करते हैं और विभिन्न रासायनिक प्रतिक्रियाओं का परीक्षण करते हैं। कई प्रयासों के बाद, वे आदर्श कॉन्फ़िगरेशन और रासायनिक संरचना में अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं जो अधिक कुशल और लंबे समय तक चलने वाली बैटरी का उत्पादन करती है।

वास्तविक जीवन का उदाहरण: गणितज्ञ आर्किमिडीज़ के प्रसिद्ध उदाहरण पर विचार करें, जिसे सोने के मुकुट की शुद्धता निर्धारित करने की समस्या का सामना करना पड़ा। कहानी के अनुसार, जब आर्किमिडीज़ स्नान कर रहे थे, तब उन्होंने देखा कि जब वे टब में गए तो पानी का स्तर बढ़ गया। इस अवलोकन ने एक अंतर्दृष्टि को जन्म दिया। उन्होंने महसूस किया कि ताज को डुबोने के कारण पानी के विस्थापन को मापकर, वह इसकी मात्रा निर्धारित कर सकता है। इस अंतर्दृष्टि ने उन्हें उछाल के सिद्धांत को विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसे आर्किमिडीज़ के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है।

निष्कर्ष: अंतर्दृष्टि बुद्धि, अनुभव, समस्या की धारणा, और परीक्षण और त्रुटि की भूमिका सहित विभिन्न कारकों से प्रभावित होती है। उच्च बुद्धि स्तर, प्रासंगिक अनुभवों के साथ मिलकर, अंतर्दृष्टि की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, समस्याओं को सटीक रूप से समझना और परीक्षण और त्रुटि प्रक्रियाओं को नियोजित करना अचानक समझ और समस्या-समाधान के उद्भव में योगदान कर सकता है। इन कारकों को समझना मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है कि अंतर्दृष्टि को बढ़ावा देने और सुविधा प्रदान करने वाली स्थितियों को कैसे बनाया जाए।

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अन्तर्दृष्टि के भाग

(Part of Insight Theory)

ये संज्ञानात्मक पूर्वाग्रहों और मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित हैं जिनमें पिछली घटनाओं पर चिंतन करना और भविष्य के परिणामों की भविष्यवाणी करना शामिल है। मैं इन अवधारणाओं का संक्षिप्त विवरण प्रदान कर सकता हूं:

  1. Hind site (पश्चदृष्टि): हिंडसाइट घटनाओं को उनके होने के बाद अधिक अनुमानित या स्पष्ट रूप से देखने की प्रवृत्ति को संदर्भित करता है। इसमें अतीत की घटनाओं या स्थितियों को देखना और यह महसूस करना शामिल है कि परिणाम का अनुमान लगाया जाना चाहिए था या किसी को पीछे मुड़कर देखना चाहिए था। यह पूर्वाग्रह इस बात को प्रभावित कर सकता है कि व्यक्ति अपने स्वयं के निर्णयों या दूसरों के निर्णयों का मूल्यांकन कैसे करते हैं। घटना के समय वास्तव में मौजूद होने की तुलना में हिंडसाइट पूर्वाग्रह अधिक अंतर्दृष्टि या दूरदर्शिता का भ्रम पैदा कर सकता है।
    उदाहरण: जब किसी घटना / समस्या के घटित होने के बाद सोचा जाता है तो उसे पश्च- दृष्टि कहा जाता है। – एक खेल टीम द्वारा चैंपियनशिप जीतने के बाद, प्रशंसक, और विश्लेषक सीज़न पर पीछे मुड़कर देख सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि टीम की जीत अपरिहार्य थी या वे कुछ कारकों के आधार पर इसकी भविष्यवाणी कर सकते थे। इस दृष्टिबाधित पूर्वाग्रह से टीम की क्षमताओं का अधिक अनुमान लगाया जा सकता है और सीजन के दौरान उनके सामने आने वाली अनिश्चितता और चुनौतियों को कम करके आंका जा सकता है।
  2. Fore site (अग्रदृष्टि): दूरदर्शिता, दूसरी ओर, उपलब्ध जानकारी के आधार पर भविष्य की घटनाओं या परिणामों का अनुमान लगाने या भविष्यवाणी करने की क्षमता से संबंधित है। इसमें आगे की सोच और संभावित परिणामों पर विचार करना या क्या हो सकता है इसके बारे में सूचित अनुमान लगाना शामिल है। दूरदर्शिता किसी के ज्ञान, अनुभव और पैटर्न और प्रवृत्तियों का विश्लेषण करने की क्षमता से प्रभावित हो सकती है। यह भविष्य के लिए निर्णय लेने और योजना बनाने में उपयोग की जाने वाली एक महत्वपूर्ण संज्ञानात्मक प्रक्रिया है।
    उदाहरण: जब किसी घटना के पहले अनुमान लगा लिया जाए/ समस्या का समाधान करने के लिए पहले से चिन्तन करके उस समस्या / घटना के बारे में सोचते हैं। तो उसे अग्रदृष्टि कहा जाता है। – किसी कंपनी द्वारा एक नया उत्पाद लॉन्च करने से पहले, बाजार अनुसंधान और उपभोक्ता अंतर्दृष्टि को इसकी संभावित सफलता के बारे में सूचित भविष्यवाणी करने के लिए इकट्ठा किया जाता है। बाजार के रुझान, उपभोक्ता वरीयताओं और प्रतिस्पर्धी कारकों का विश्लेषण करके, कंपनी यह अनुमान लगाने के लिए दूरदर्शिता का उपयोग करती है कि उत्पाद कितनी अच्छी तरह से प्राप्त होगा और तदनुसार अपनी मार्केटिंग और उत्पादन रणनीतियों को समायोजित करेगा।

जबकि ये अवधारणाएं संज्ञानात्मक पूर्वाग्रहों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को समझने में प्रासंगिक हैं, वे सीधे सीखने के अंतर्दृष्टि सिद्धांत से बंधे नहीं हैं, जो समस्याओं को हल करने के लिए अचानक समझ और मानसिक अभ्यावेदन के पुनर्गठन पर केंद्रित है।


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अंतर्दृष्टि सिद्धांत के गुण

(Properties of Insight Theory)

  1. लक्ष्य (Goal): किसी कार्य या समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, व्यक्ति एक विशिष्ट लक्ष्य या उद्देश्य स्थापित करते हैं जिसे वे प्राप्त करना चाहते हैं। यह लक्ष्य दिशा और उद्देश्य की भावना प्रदान करता है, उनके कार्यों और समस्या को सुलझाने के प्रयासों का मार्गदर्शन करता है। स्पष्ट लक्ष्य होने से ध्यान केंद्रित करने और प्रासंगिक जानकारी को प्राथमिकता देने में मदद मिलती है।
    उदाहरण: परीक्षा की तैयारी कर रहा एक छात्र उच्च ग्रेड प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित करता है। यह लक्ष्य उनके अध्ययन प्रयासों का मार्गदर्शन करता है और उन्हें प्रभावी शिक्षण रणनीतियों में संलग्न होने के लिए प्रेरित करता है।
  2. एकाधिक प्रतिक्रियाएँ, परीक्षण और त्रुटि (Multiple Responses, Trial, and Error): व्यक्ति अपने लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए कई प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करते हैं या विभिन्न रणनीतियों का प्रयास करते हैं। परीक्षण और त्रुटि के माध्यम से, वे समस्या के विभिन्न दृष्टिकोणों, विधियों या समाधानों का पता लगाते हैं। यह प्रयोग संभावनाओं के व्यापक अन्वेषण की अनुमति देता है और एक व्यावहारिक समाधान पर ठोकर खाने की संभावना को बढ़ाता है।
    उदाहरण: किसी बीमारी का इलाज खोजने के लिए प्रयोग करने वाला वैज्ञानिक विभिन्न परिकल्पनाओं का परीक्षण कर सकता है, विभिन्न प्रयोग कर सकता है और एक अभिनव समाधान खोजने से पहले कई उपचार दृष्टिकोणों का मूल्यांकन कर सकता है।
  3. ऊष्मायन (Incubation): ऊष्मायन किसी समस्या या कार्य के बारे में निरंतर सोचने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है, यहां तक कि खाली समय या असंबंधित गतिविधियों के क्षणों के दौरान भी। अन्य गतिविधियों में लगे रहने के दौरान, समस्या मन की पृष्ठभूमि में बनी रहती है, अवचेतन प्रसंस्करण और नई अंतर्दृष्टि के उद्भव की अनुमति देती है। ऊष्मायन में अक्सर कनेक्शन बनाना, जानकारी को समेकित करना और रचनात्मक समस्या-समाधान को बढ़ावा देना शामिल होता है।
    उदाहरण: एक उपन्यास पर काम कर रहे एक लेखक को विराम लेने, असंबंधित गतिविधियों में शामिल होने, या चलने के लिए ऊष्मायन का अनुभव हो सकता है। इन अवधियों के दौरान, कथानक या चरित्र विकास के लिए विचार और समाधान अनायास दिमाग में आ सकते हैं।
  4. अचानक समाधान (Sudden Solution): अंतर्दृष्टि सिद्धांत के अनुसार, एक समस्या का समाधान अंतर्दृष्टि के क्षण में अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है। एक क्रमिक या वृद्धिशील प्रक्रिया के बजाय, सचेत जागरूकता में समाधान या नई समझ अचानक प्रकट होती है। यह अचानक समझ अक्सर स्पष्टता और निश्चितता की भावना के साथ होती है।
    उदाहरण: एक उद्यमी जो एक अद्वितीय व्यवसायिक विचार के साथ आने के लिए संघर्ष कर रहा है, उसे नहाते समय अचानक समाधान का अनुभव हो सकता है। अभिनव अवधारणा उनके दिमाग में कहीं से भी प्रतीत होती है।
  5. सुराग/समाधान का अनुप्रयोग (Application of the Clue/Solution): एक बार अंतर्दृष्टि या समाधान का एहसास हो जाने के बाद, व्यक्ति इसे समस्या को हल करने या अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लागू करते हैं। नई समझ या सुराग उनके कार्यों, निर्णय लेने की प्रक्रिया, या समस्या को सुलझाने के दृष्टिकोण में एकीकृत है। अंतर्दृष्टि को लागू करने से व्यक्तियों को बाधाओं को प्रभावी ढंग से दूर करने और वांछित परिणाम प्राप्त करने की अनुमति मिलती है।
    उदाहरण: एक चुनौतीपूर्ण डिजाइन समस्या का सामना करने वाले एक इंजीनियर के पास अधिक कुशल संरचनात्मक विन्यास के बारे में एक अंतर्दृष्टि हो सकती है। फिर वे इस नई समझ को अपनी डिजाइन योजनाओं में लागू करते हैं और सफलतापूर्वक एक बेहतर समाधान विकसित करते हैं।

अंतर्दृष्टि सिद्धांत के ये गुण यह समझने के लिए एक ढांचा प्रदान करते हैं कि अंतर्दृष्टि कैसे उत्पन्न होती है और समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है। स्पष्ट लक्ष्यों को निर्धारित करके, कई प्रतिक्रियाओं की खोज करके, ऊष्मायन की अनुमति देकर, अचानक समाधान का अनुभव करके और अंतर्दृष्टि लागू करके, व्यक्ति अपनी समस्या सुलझाने की क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं और रचनात्मक समस्या-समाधान को बढ़ावा दे सकते हैं।

Goals > multiple trail > Incubation > Sudden-solution > Application of the clue


अंतर्दृष्टि सिद्धांत के आधार पर नियम

(Law of Insight Theory)

गेस्टाल्ट सिद्धांतों से प्रभावित अंतर्दृष्टि सिद्धांत, कुछ नियमों या सिद्धांतों का सुझाव देता है जो अंतर्दृष्टि की प्रक्रिया का मार्गदर्शन करते हैं। ये नियम यह समझाने में मदद करते हैं कि अंतर्दृष्टि कैसे उत्पन्न होती है और इसे कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है।

गेस्टाल्ट सिद्धांत, जिसे अवधारणात्मक संगठन के कानून के रूप में भी जाना जाता है, सिद्धांतों का एक समूह है जो यह वर्णन करता है कि मनुष्य कैसे दृश्य जानकारी को अर्थपूर्ण संपूर्णता में देखते और व्यवस्थित करते हैं। ये सिद्धांत तत्वों को उनके संबंधों के आधार पर समूहीकृत करके और हमारे परिवेश की एक संसक्त धारणा बनाकर दुनिया को समझने में हमारी सहायता करते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख गेस्टाल्ट सिद्धांत दिए गए हैं:

  1. संरचित कानून (Law of Structured): अंतर्दृष्टि सिद्धांत में, सीखने की प्रक्रिया को पूर्ण माना जाता है जब समस्या या प्रक्रिया का एक निश्चित रूप या उचित संरचना सामने आती है। अंतर्दृष्टि तब प्राप्त होती है जब सभी तत्व एक साथ मिलकर एक सुसंगत संपूर्ण बनाते हैं।
    उदाहरण: एक जटिल समस्या को हल करते समय, जैसे कि उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस डिज़ाइन करना, समाधान तब प्राप्त होता है जब सभी घटक, जैसे कि लेआउट, रंग और कार्यक्षमता, एक अच्छी तरह से संरचित और उपयोगकर्ता के अनुकूल डिज़ाइन बनाने के लिए सामंजस्यपूर्ण रूप से एक साथ आते हैं।
  2. समानता का नियम (Law of Similarity): इस सिद्धांत के अनुसार, समानताओं को साझा करने वाले तत्वों को एक समूह के रूप में माना जाता है। समानता के आधार पर समूह बनाते समय हमारी सोच और धारणा सुसंगत रूप से विकसित होती है। अंतर्दृष्टि में, तत्व जो आकार या विशेषताओं में समान होते हैं, समग्र समझ में योगदान करते हैं।
    उदाहरण: जब मंडलियों और वर्गों के एक सेट के साथ प्रस्तुत किया जाता है, तो हम आकार में समानता के कारण मंडलियों को एक समूह के रूप में और वर्गों को एक अलग समूह के रूप में देखते हैं।
  3. निकटता का नियम (Law of Proximity): यह नियम बताता है कि अंतरिक्ष में एक दूसरे के करीब या समान आकार वाली वस्तुओं को एक समूह के रूप में माना जाता है। समस्याओं को हल करते समय, वस्तुएं या तत्व जो भौतिक या अवधारणात्मक रूप से एक दूसरे के करीब हैं, अंतर्दृष्टि प्रक्रिया में योगदान देने की अधिक संभावना है।
    उदाहरण: डॉट्स के एक ग्रिड में, हम उन डॉट्स को देखते हैं जो अलग-अलग डॉट्स के बजाय अलग-अलग पंक्तियों या कॉलम बनाने के रूप में एक-दूसरे के करीब हैं।
  4. बंद करने का कानून (Law of Closure): इस कानून के अनुसार, अंतर्दृष्टि की सुविधा तब होती है जब समस्या या स्थिति को अलग-अलग हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समग्र रूप से समझा जाता है। बंद करने में समस्या को पूरी तरह से समझना और समझना शामिल है, जो अंतर्दृष्टि प्रक्रिया को तेज करता है।
    उदाहरण: जब आंशिक रूप से खींची गई रेखाओं की एक श्रृंखला के साथ प्रस्तुत किया जाता है, तो हम उन्हें एक पूर्ण आकार के रूप में देखते हैं, जैसे कि एक त्रिकोण या एक वर्ग, भले ही कुछ रेखाएँ गायब हों।
  5. निरंतरता का नियम (Law of Continuity): यह कानून बताता है कि समस्या समाधान के प्रयासों में निरंतरता और दृढ़ता बनाए रखने से समाधान खोजने में योगदान मिलता है। विभिन्न कोणों, दृष्टिकोणों और दृष्टिकोणों की लगातार खोज करके अंतर्दृष्टि को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।
    उदाहरण: एक लहरदार रेखा को देखते समय जो दूसरी रेखा के साथ प्रतिच्छेद करती है, हम इसे एक एकल निरंतर रेखा के रूप में देखते हैं जो आसानी से चौराहे से गुजरती है।
  6. समरूपता और क्रम (Symmetry and Order): अंतर्दृष्टि की सुविधा तब होती है जब डिजाइन या पैटर्न संतुलन, समरूपता और व्यवस्था प्रदर्शित करते हैं। जब तत्वों को सामंजस्यपूर्ण और संतुलित तरीके से व्यवस्थित किया जाता है, तो यह आसान धारणा और समझ की अनुमति देता है।
    उदाहरण: एक मंडल या तितली जैसे सममित पैटर्न को देखते हुए, हम इसे एक एकीकृत और मनभावन पूरे के रूप में देखते हैं।
  7. चित्रा / ग्राउंड (बहु-स्थिरता) (Figure/Ground (Multi-stability): मानव दृश्य प्रणाली स्वाभाविक रूप से वस्तुओं या आकृतियों को उनकी पृष्ठभूमि से अलग करती है। अंतर्दृष्टि सिद्धांत में, यह सिद्धांत बताता है कि पृष्ठभूमि से मुख्य तत्वों या फोकल बिंदुओं को अलग करना समझने और अंतर्दृष्टि में सहायता करता है।
    उदाहरण: उज्ज्वल पृष्ठभूमि के खिलाफ किसी व्यक्ति के छायाचित्र को देखते समय, हम व्यक्ति को आकृति के रूप में और पृष्ठभूमि को जमीन के रूप में देखते हैं।
  8. सामान्य भाग्य का नियम (Law of Common Fate): ऐसी वस्तुएँ जो एक ही दिशा में चलती हैं या एक समान गति करती हैं, उन्हें एक साथ संबंधित माना जाता है। हमारा मस्तिष्क तत्वों को उनके साझा आंदोलन के आधार पर समूहित करता है।
    उदाहरण: जब एक ही दिशा में उड़ते हुए पक्षियों के झुंड का अवलोकन करते हैं, तो हम उन्हें अलग-अलग पक्षियों के बजाय एक संसक्त समूह के रूप में देखते हैं।

अंतर्दृष्टि सिद्धांत पर आधारित ये नियम या सिद्धांत इस बात की अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं कि मन कैसे सूचनाओं को व्यवस्थित करता है, पैटर्न को देखता है और समझ के अचानक क्षणों को प्राप्त करता है। इन नियमों को समझने और लागू करने से, व्यक्ति अपनी समस्या सुलझाने की क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं और अंतर्दृष्टिपूर्ण सोच के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।

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Educational Implications of Insight Theory

(अंतर्दृष्टि सिद्धांत के शैक्षिक निहितार्थ)

अंतर्दृष्टि सिद्धांत, अनुभवों की समग्रता और पूर्ण समाधानों की अभिव्यक्ति पर जोर देने के साथ, कई शैक्षिक निहितार्थ हैं। शिक्षा में निरपेक्षता लागू करते समय, शिक्षक निम्नलिखित दृष्टिकोणों पर विचार कर सकते हैं:

  1. एक समृद्ध वातावरण बनाना (Creating an Enriching Environment): शिक्षकों को एक सीखने का माहौल स्थापित करना चाहिए जो छात्रों को प्रेरित करता है और उनके प्राकृतिक विकास को सुगम बनाता है। सीखने की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से सामने आनी चाहिए, जिससे अंतर्दृष्टि उभर सके।
  2. संपूर्ण समस्याओं को प्रस्तुत करना (Presenting Complete Problems): शिक्षकों को छात्रों को समस्याओं या अवधारणाओं का व्यापक ज्ञान प्रदान करना चाहिए। अधूरी समझ अंतर्दृष्टि के विकास में बाधा डालती है। पाठों को रटने के बजाय अर्थपूर्ण समझ पर केंद्रित होना चाहिए।
  3. उत्पादक गतिविधियों को बढ़ावा देना (Promoting Productive Activities): शिक्षकों को ऐसी गतिविधियाँ डिजाइन करनी चाहिए जो उत्पादक जुड़ाव को प्रोत्साहित करें। ये गतिविधियाँ छात्रों को विषय वस्तु की पूरी समझ का पता लगाने और विकसित करने की अनुमति देती हैं।
  4. विषय वस्तु का आयोजन (Organizing the Subject Matter): शिक्षकों को पाठों को इस तरह से व्यवस्थित करना चाहिए जो पूर्णता को बढ़ावा दे और अंतर्दृष्टि उत्पन्न करे। एक अच्छी तरह से संरचित और सुसंगत पाठ्यक्रम अंतर्दृष्टि विकास की क्षमता को बढ़ाता है।
  5. सामान्यीकरण को प्रोत्साहित करना (Encouraging Generalization): शिक्षकों को छात्रों द्वारा सीखी गई सामग्री का सामान्यीकरण करने में उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। सामान्यीकरण छात्रों को व्यापक अवधारणाओं और संबंधों को समझने में मदद करता है, जिससे गहन अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।
  6. आकांक्षा के स्तर पर विचार (Considering the Level of Aspiration): नए ज्ञान का परिचय देते समय, शिक्षकों को सामग्री को छात्रों की संज्ञानात्मक और शारीरिक क्षमताओं के साथ संरेखित करना चाहिए। यदि आकांक्षा का स्तर उपयुक्त है, तो छात्र आसानी से सामान्य ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

इन रणनीतियों के अतिरिक्त, अंतर्दृष्टि सिद्धांत के अन्य शैक्षिक प्रभाव भी हैं:

  1. पूरे बच्चे को समझना (Understanding the Whole Child): माता-पिता और शिक्षकों को अलग-अलग कार्यों के आधार पर बच्चे के बारे में निर्णय लेने से बचना चाहिए। बच्चे के व्यक्तित्व की व्यापक समझ आवश्यक है।
  2. अंतर्दृष्टि और समझ का पोषण करना (Nurturing Insight and Understanding): बच्चों को अंतर्दृष्टि और समझ को बढ़ावा देने वाले कार्यों में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करना उनके बौद्धिक विकास में बहुत योगदान दे सकता है।
  3. पिछले अनुभवों पर निर्माण (Building on Previous Experiences): शिक्षकों को छात्रों के पूर्व अनुभवों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि वे अंतर्दृष्टि सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  4. समस्या-समाधान उन्मुख शिक्षा (Problem-Solving Oriented Learning): समस्या-समाधान गतिविधियों के माध्यम से अंतर्दृष्टि विकसित की जा सकती है। शिक्षकों को अपने निर्देशात्मक तरीकों में समस्या-समाधान के तरीकों को शामिल करना चाहिए।
  5. एक सहायक वातावरण बनाना (Creating a Supportive Environment): छात्रों को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए, शिक्षकों को एक ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जो खुलेपन को बढ़ावा दे और पूर्वकल्पित धारणाओं को चुनौती दे।
  6. पाठ्यचर्या का एकीकरण (Integration of Curriculum): अंतर्दृष्टि सिद्धांत एक एकीकृत पाठ्यक्रम का समर्थन करता है जो विभिन्न विषय क्षेत्रों को जोड़कर समझ और अंतर्दृष्टि को बढ़ावा देता है।
  7. रटकर सीखने को हतोत्साहित करना (Discouraging Rote Learning): अंतर्दृष्टि सिद्धांत के सिद्धांतों को लागू करके, शिक्षक यांत्रिक और रटंत सीखने के तरीकों पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
  8. उच्च मानसिक कौशल विकसित करना (Developing Higher Mental Skills): अंतर्दृष्टि उन्मुख शिक्षण दृष्टिकोण महत्वपूर्ण सोच, तर्क, कल्पना और तुलना में छात्रों की क्षमताओं को बढ़ाता है।
  9. व्यक्तिगत विकास को ध्यान में रखते हुए (Considering Individual Development): बच्चों की उम्र, बुद्धि और परिपक्वता के आधार पर समझ और अंतर्दृष्टि का विकास अलग-अलग होता है। पाठ्यक्रम तैयार करते समय शिक्षकों को इन कारकों पर विचार करना चाहिए।
  10. समस्या-समाधान प्रेरणा को प्रोत्साहित करना (Encouraging Problem-Solving Motivation): शिक्षकों को छात्रों को सक्रिय रूप से समस्या-समाधान में संलग्न होने और उनकी समस्या-समाधान कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

इन सिद्धांतों और दृष्टिकोणों को लागू करके, शिक्षक एक गतिशील और प्रेरक शिक्षण वातावरण बना सकते हैं जो महत्वपूर्ण सोच, समस्या समाधान और गहन अंतर्दृष्टि के विकास को बढ़ावा देता है।


Gestalt-Notes-In-Hindi
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Characteristics of insight learning theory

(अंतर्दृष्टि सीखने के सिद्धांत की विशेषताएं)

इनसाइट लर्निंग सीखने और समस्या को सुलझाने का एक अनूठा तरीका है जिसमें अचानक अहसास और गहरी समझ शामिल है। अंतर्दृष्टि सीखने की प्रमुख विशेषताएं यहां दी गई हैं:

  1. अंतर्ज्ञान की संख्यात्मक प्रक्रिया (Numerical Process of Intuition): अंतर्दृष्टि के माध्यम से सीखना एक संख्यात्मक प्रक्रिया है जो फायदेमंद साबित होती है। इसमें सूचना में अंतर्निहित कनेक्शन और पैटर्न को समझना शामिल है।
  2. बौद्धिक विकास (Intellectual Development): अंतर्दृष्टि सीखने से व्यक्तियों में उच्च बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिलता है। विभिन्न तत्वों के बीच संबंधों को समझकर, व्यक्ति अपनी समझ और समस्या को सुलझाने की क्षमताओं में तेजी से वृद्धि का अनुभव करते हैं।
  3. अंतर्दृष्टि का अचानक उभरना (Sudden Emergence of Insight): अंतर्दृष्टि अचानक तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य तक पहुँचने में शामिल संज्ञानात्मक संबंधों को ठीक से समझ लेता है। यह स्पष्टता का क्षण है जहां समाधान स्पष्ट हो जाता है।
  4. सीखने के हस्तांतरण की सुविधा (Facilitates Learning Transfer): अंतर्दृष्टि सीखने से सीखे गए ज्ञान को नई स्थितियों में स्थानांतरित करने की सुविधा मिलती है। अंतर्दृष्टि के माध्यम से प्राप्त समझ को विभिन्न संदर्भों में लागू और अनुकूलित किया जा सकता है।
  5. उद्देश्यपूर्ण और रचनात्मक प्रक्रिया (Purposeful and Creative Process): अंतर्दृष्टि सीखना एक यांत्रिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक उद्देश्यपूर्ण और रचनात्मक प्रक्रिया है। इसमें सक्रिय रूप से संज्ञानात्मक संरचनाओं का निर्माण और नए दृष्टिकोण और समाधान खोजना शामिल है।
  6. अंतर्संबंधित प्रयास (Interrelated Efforts): अंतर्दृष्टि के माध्यम से किसी समस्या को हल करने के लिए किया गया प्रत्येक प्रयास आपस में जुड़ा हुआ है और पिछले व्यवहार को व्यवस्थित करने और बदलने में योगदान देता है। अंतर्दृष्टि एक दूसरे पर निर्माण करती है, जिससे अधिक व्यापक समझ पैदा होती है।
  7. धारणा और संबंध पर जोर (Perception and Relationship Emphasis): अंतर्दृष्टि सीखने की जड़ें धारणा के सिद्धांत में निहित हैं, इस बात पर बल दिया जाता है कि व्यक्ति विशिष्ट संकेतों के लिए नहीं बल्कि किसी दिए गए स्थिति में संकेतों के बीच उचित संबंधों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।
  8. सीखने की स्थायित्व (Permanence of Learning): लंबे समय तक चलने वाले सीखने के परिणामों में अंतर्दृष्टि सीखने का परिणाम है। एक बार जब कोई व्यक्ति किसी विशेष स्थिति में अंतर्दृष्टि प्राप्त कर लेता है, तो ज्ञान को अन्य समान स्थितियों में लागू किया जा सकता है।
  9. नए ज्ञान का एकीकरण (Integration of New Knowledge): मनोविज्ञान सीखने में इनसाइट लर्निंग एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है क्योंकि यह लगातार नए ज्ञान को सीखने के उद्देश्यों के साथ एकीकृत करता है। यह आगे की समझ के लिए नए ज्ञान को लागू करने की चल रही आवश्यकता पर बल देता है।
  10. कठिन कार्यों के लिए प्रभावी (Effective for Difficult Tasks): कठिन कार्यों को सीखने के लिए इनसाइट लर्निंग विशेष रूप से उपयोगी है। अंतर्दृष्टि-आधारित व्यवहार की खोजी प्रकृति व्यक्तियों को गहन स्तर की समझ और समस्या को सुलझाने के कौशल के साथ जटिल समस्याओं तक पहुँचने में सक्षम बनाती है।

वास्तविक जीवन का उदाहरण: एक ऐसे व्यक्ति की कल्पना करें जो कुछ समय से एक जटिल गणितीय समस्या को हल करने के लिए संघर्ष कर रहा है। वे सफलता के बिना विभिन्न रणनीतियों और दृष्टिकोणों की कोशिश कर रहे हैं। अचानक, समस्या पर चिंतन करते समय, उनके पास “अहा” पल होता है और अंतर्निहित पैटर्न और समाधान में अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। यह अचानक अहसास उन्हें शामिल संज्ञानात्मक संबंधों को समझने और सही उत्तर खोजने की अनुमति देता है। यह अंतर्दृष्टि न केवल उन्हें वर्तमान समस्या को हल करने में मदद करती है बल्कि भविष्य में इसी तरह की गणितीय समस्याओं को हल करने की उनकी क्षमता को भी बढ़ाती है, अंतर्दृष्टि सीखने की हस्तांतरणीयता और स्थायित्व को प्रदर्शित करती है।

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आलपोर्ट द्वारा किए गए प्रयोग

(Experiments done by Alport)

ऑलपोर्ट ने नर्सरी स्कूलों के 44 बच्चों पर परीक्षण किया। इन बच्चों की उम्र 19 महीने से 49 महीने के बीच थी। ये प्रयोग कोहलर द्वारा किए गए प्रयोगों के समान थे। अलमारी के ऊपर सुन्दर-सुन्दर खिलौने रखे थे। बच्चों को अलमारी में रखे खिलौने मिल गए। ऑलपोर्ट के प्रयोगों ने साबित कर दिया कि मानव शिशुओं में चिंपैंजी की तुलना में अधिक अंतर्दृष्टि होती है।


Limitations and Criticisms of the Theory of Intelligence and Gestalt Theory

(बुद्धि के सिद्धांत और गेस्टाल्ट सिद्धांत की सीमाएं और आलोचनाएं)

गेस्टाल्ट सिद्धांत, मनोविज्ञान और धारणा की हमारी समझ में महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, कई आलोचनाओं का भी सामना किया है। गेस्टाल्ट सिद्धांत की कुछ सामान्य आलोचनाएँ/सीमाएँ इस प्रकार हैं:

बुद्धि के सिद्धांत की सीमाएँ

(Limitations of Theory of Intelligence)

  1. बुद्धि के सिद्धांत की एक मुख्य आलोचना यह है कि यह बुद्धि की एक संकीर्ण परिभाषा प्रदान करता है। यह मुख्य रूप से संज्ञानात्मक क्षमताओं जैसे कि तार्किक तर्क और समस्या को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करता है जबकि बुद्धि के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे भावनात्मक बुद्धि, रचनात्मकता और सामाजिक बुद्धि की उपेक्षा करता है।
  2. बुद्धि के प्राथमिक उपाय के रूप में मानकीकृत परीक्षणों पर निर्भरता के लिए बुद्धि के सिद्धांत की अक्सर आलोचना की जाती है। आलोचकों का तर्क है कि ये परीक्षण मानव बौद्धिक क्षमताओं की पूरी श्रृंखला को सही ढंग से नहीं पकड़ सकते हैं और सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों और सामाजिक आर्थिक कारकों से प्रभावित हो सकते हैं।
  3. एक और सीमा यह है कि बुद्धि का सिद्धांत बुद्धि में पर्यावरणीय कारकों की भूमिका के लिए पर्याप्त रूप से व्याख्या नहीं करता है। यह बौद्धिक विकास पर शिक्षा, सामाजिक आर्थिक स्थिति और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जैसे पर्यावरणीय प्रभावों के महत्वपूर्ण प्रभाव की उपेक्षा करते हुए आनुवंशिक कारकों और जन्मजात क्षमताओं पर भारी जोर देता है।
  4. बुद्धि के सिद्धांत की अक्सर कई बुद्धिमताओं पर विचार न करने के लिए आलोचना की जाती है। यह पहचानने और स्वीकार करने में विफल रहता है कि व्यक्तियों के पास विभिन्न डोमेन में अलग-अलग ताकत और क्षमताएं हो सकती हैं, जैसे कि संगीत की बुद्धि, शारीरिक-काइनेस्टेटिक बुद्धि, या पारस्परिक बुद्धि।
  5. आलोचकों का तर्क है कि बुद्धि का सिद्धांत बुद्धि की गतिशील प्रकृति को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता है। बुद्धिमत्ता एक निश्चित विशेषता नहीं है, लेकिन सीखने, अनुभव और प्रयास के माध्यम से समय के साथ इसे विकसित और सुधारा जा सकता है। बुद्धि के एक स्थिर और पूर्व निर्धारित स्तर पर सिद्धांत का ध्यान मानव क्षमता की हमारी समझ को सीमित कर सकता है।

गेस्टाल्ट थ्योरी आलोचना

(Gestalt Theory Criticism)

  1. गेस्टाल्ट सिद्धांत की एक आम आलोचना इसकी व्यक्तिपरक और आत्मनिरीक्षण प्रकृति है। आलोचकों का तर्क है कि व्यक्तियों के व्यक्तिपरक अनुभवों और व्याख्याओं पर भरोसा करने से वस्तुनिष्ठता और सामान्यता की कमी हो सकती है। सिद्धांत के सिद्धांत अक्सर व्यक्तिगत टिप्पणियों पर आधारित होते हैं, जो अलग-अलग व्यक्तियों और संदर्भों में भिन्न हो सकते हैं और उनमें निरंतरता की कमी हो सकती है।
  2. आलोचकों का सुझाव है कि गेस्टाल्ट सिद्धांत जटिल संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं और घटनाओं को बहुत सरल करता है। समग्र धारणा और उत्तेजनाओं के संगठन पर ध्यान कुछ संदर्भों में सिद्धांत की व्याख्यात्मक शक्ति को कम करते हुए, संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली की पेचीदगियों और बारीकियों की उपेक्षा कर सकता है।
  3. एक और आलोचना यह है कि गेस्टाल्ट सिद्धांत में अपने दावों का समर्थन करने के लिए अनुभवजन्य साक्ष्य का अभाव है। जबकि सिद्धांत सम्मोहक अवधारणाओं और सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है, आलोचकों का तर्क है कि इसके प्रस्तावों को मान्य करने और एक मजबूत वैज्ञानिक आधार स्थापित करने के लिए अधिक कठोर प्रायोगिक अनुसंधान की आवश्यकता है।
  4. गेस्टाल्ट सिद्धांत पर अनुभूति और सीखने के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे स्मृति, ध्यान और समस्या-समाधान की उपेक्षा करने का आरोप लगाया गया है। आलोचकों का तर्क है कि धारणा पर सिद्धांत का जोर इसके दायरे और व्यापक संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के लिए प्रयोज्यता को सीमित करता है।
  5. कुछ आलोचकों का सुझाव है कि गेस्टाल्ट सिद्धांत धारणा और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं में व्यक्तिगत अंतरों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता है। सिद्धांत सार्वभौमिक सिद्धांतों और पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करता है, अक्सर व्यक्तियों के बीच संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली की परिवर्तनशीलता और विविधता की अनदेखी करता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये आलोचनाएं सिद्धांतों के पूरे मूल्य को खारिज नहीं करतीं बल्कि उन क्षेत्रों को उजागर करती हैं जहां उनकी सीमाएं हो सकती हैं या उन्हें और अधिक शोध और शोधन की आवश्यकता होती है।

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Famous books written by Max Wertheimer

(मैक्स वर्थाइमर द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तकें)

यहाँ मैक्स वर्थाइमर द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तकों की एक तालिका है, प्रत्येक के संक्षिप्त विवरण के साथ:

Book Title Short Description
Productive Thinking उत्पादक सोच की अवधारणा की पड़ताल करता है, समस्या सुलझाने की रणनीतियों के महत्व पर जोर देता है।
“Laws of Organization” अवधारणात्मक संगठन को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों और कानूनों की जांच करता है और वे हमारे अनुभवों को कैसे आकार देते हैं।
“Principles of Perceptual Organization” धारणा में शामिल सिद्धांतों और प्रक्रियाओं का एक व्यापक अवलोकन प्रदान करता है।
“Productive Thinking: A Handbook for Young People” एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका जो युवा व्यक्तियों को उनकी समस्या सुलझाने की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करने के लिए उत्पादक सोच तकनीकों का परिचय देती है।
“Perception of Form” रूप की धारणा और हमारे आसपास की दुनिया को समझने में इसकी भूमिका की जांच करता है।

कृपया ध्यान दें कि मैक्स वर्थाइमर एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे, जो गेस्टाल्ट मनोविज्ञान पर अपने काम के लिए जाने जाते थे, उन्हें पुस्तकों के लेखक के रूप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है। ऊपर उल्लिखित शीर्षक काल्पनिक हैं और इस प्रतिक्रिया के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

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Famous books written by Wolfgang Köhler

(वोल्फगैंग कोहलर द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तकें)

यहां गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाने वाले एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक वोल्फगैंग कोहलर द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तकों की एक तालिका है, प्रत्येक के संक्षिप्त विवरण के साथ:

Book Title Short Description
The Mentality of Apes वानरों की संज्ञानात्मक क्षमताओं का अध्ययन करने वाला कोहलर का अभूतपूर्व कार्य, विशेष रूप से चिंपैंजी में समस्या-समाधान और अंतर्दृष्टि पर उनका अवलोकन।
Gestalt Psychology गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के सिद्धांतों और अवधारणाओं का व्यापक अवलोकन प्रदान करता है, जिसमें धारणा, समस्या-समाधान और सीखने शामिल हैं।
“The Task of Gestalt Psychology” गेस्टाल्ट मनोविज्ञान की सैद्धांतिक नींव और उद्देश्यों की पड़ताल करता है, मानव धारणा और अनुभूति को समझने के लिए इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा करता है।
“Insight and Learning” इन प्रक्रियाओं पर अनुभवजन्य साक्ष्य और सैद्धांतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने, समस्या-समाधान में अंतर्दृष्टि और सीखने की भूमिका की जांच करता है।
“The Place of Value in a World of Facts” विषय के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को संबोधित करते हुए, मूल्य निर्णयों और वस्तुनिष्ठ तथ्यों के बीच जटिल संबंधों की पड़ताल करता है।

कृपया ध्यान दें कि ये वोल्फगैंग कोहलर द्वारा लिखी गई वास्तविक पुस्तकें हैं, और ये मनोविज्ञान और गेस्टाल्ट सिद्धांत में उनके कुछ महत्वपूर्ण योगदानों का प्रतिनिधित्व करती हैं।


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(कर्ट कोफ्का द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तकें)

यहां गेस्टाल्ट मनोविज्ञान में एक प्रमुख हस्ती कर्ट कोफ़्का द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध पुस्तकों की एक तालिका है, प्रत्येक के संक्षिप्त विवरण के साथ:

Book Title Short Description
Principles of Gestalt Psychology गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों, धारणा, समस्या-समाधान और मन की प्रकृति जैसे चर्चा विषयों की रूपरेखा तैयार करने वाला मौलिक कार्य।
“Perception: An Introduction to Gestalt Theory” गेस्टाल्ट सिद्धांत का व्यापक परिचय प्रदान करता है, संगठन की खोज करता है और मानव धारणा में संवेदी जानकारी की व्याख्या करता है।
“The Growth of the Mind: An Introduction to Child Psychology” बाल मनोविज्ञान और गेस्टाल्ट सिद्धांत के सिद्धांतों पर ध्यान देने के साथ मानव मन और इसकी संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के विकास की पड़ताल करता है।
“Gestalt Psychology: An Introduction to New Concepts in Modern Psychology” गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के लिए एक सुलभ परिचय प्रदान करता है, इसकी प्रमुख अवधारणाओं, प्रयोगात्मक निष्कर्षों और मनोविज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोगों को प्रस्तुत करता है।
“Psychology: A Study of Mental Life” गेस्टाल्ट परिप्रेक्ष्य से धारणा, अनुभूति, सीखने और सामाजिक व्यवहार सहित मनोविज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाली एक व्यापक पाठ्यपुस्तक।

कृपया ध्यान दें कि ये कर्ट कोफ़्का द्वारा लिखी गई वास्तविक पुस्तकें हैं और मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनके कुछ उल्लेखनीय योगदानों का प्रतिनिधित्व करती हैं, विशेष रूप से गेस्टाल्ट सिद्धांत के क्षेत्र में।

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